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मनरेगा का ‘महाघोटाला’: 20 KM दूर, 9 मिनट का अंतर, दो गांवों में एक ही ‘नक़ली शक्ल’ पर 20 मजदूरों की हाजिरी! ​

मनरेगा का ‘महाघोटाला’: 20 KM दूर, 9 मिनट का अंतर… दो गांवों में एक ही ‘नक़ली शक्ल’ पर 20 मजदूरों की हाजिरी ।

ज़ीरो टॉलरेंस पर भ्रष्टाचार की ‘जीरो’ मोहर: मौदहा में NMMS ऐप को धता बताकर सरकारी खज़ाने की खुली लूट का पर्दाफाश।

​वक्फ टुडे 

मौदहा/हमीरपुर:  जिले की मौदहा तहसील के विकास खंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत चल रहे कार्यों में उपस्थिति दर्ज करने के तरीके ने फर्जीवाड़े की सभी सीमाएं लांघ दी हैं। सिसोलर और करहिया—दो ऐसी ग्राम पंचायतें जिनके कार्यस्थलों की दूरी लगभग 20 किलोमीटर है. ।

गौर तलब है कि NMMS (नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम) ऐप पर उपस्थिति दर्ज करते समय एक ही समूह फोटो का इस्तेमाल किया गया है। यह सनसनीखेज खुलासा मनरेगा के डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम में एक बड़े भ्रष्टाचार और फ़र्ज़ी श्रमिकों के रैकेट की ओर साफ इशारा करता है।

एक ही तस्वीर, अलग-अलग पंचायतें: आंकड़ों में ‘फर्जीवाड़ा’
​प्राप्त आधिकारिक अटेंडेंस रिकॉर्ड्स के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को दोनों पंचायतों में श्रमिकों की हाजिरी ली गई। दोनों कार्यस्थलों पर अटेंडेंस मेट, श्रमिकों के नाम और काम का विवरण पूरी तरह अलग है, फिर भी रिकॉर्ड के मुताबिक:

विवरण
ग्राम पंचायत करहिया (मस्टर रोल न0: 7377)
ग्राम पंचायत सिसोलर (कार्य कोड: 7219)
कार्यस्थल की दूरी
लगभग 20 KM की दूरी
फोटो लेने का समय
14:13:05:000
14:22:52:000
समय का अंतर
सिर्फ 9 मिनट
अटेंडेंस मेट
नीता देवी
सीता देवी

श्रमिकों की संख्या
10 अलग नाम (संजना, भरत, ललिता आदि)
10 अलग नाम (रानी, सोनू, ममता आदि)
समूह फोटो
बिल्कुल एक समान (Same Photo)

प्रभारी बीडीओ का बयान: एपीओ को तत्काल जांच के निर्देश: 
​मामले की गंभीरता को देखते हुए, जब संवाददाता ने इस जालसाजी के संबंध में प्रभारी बीडीओ मौदहा से संपर्क किया, तो उन्होंने तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया।
​प्रभारी बीडीओ मौदहा ने कहा, “यह एक गंभीर मामला है। NMMS ऐप पर इस तरह का दोहराव घोर अनियमितता है और हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।

मैंने एपीओ मौदहा को तत्काल प्रभाव से दोनों ग्राम पंचायतों के इस अटेंडेंस रिकॉर्ड की गहन जांच कर, जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा है। जांच में दोषी पाए जाने वाले मेट, ग्राम पंचायत कर्मियों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
​इस ‘एक फोटो, दो गाँव’ के खेल ने मनरेगा के फंड में हो रहे करोड़ों के घोटाले की आशंका को जन्म दिया है। जिला प्रशासन को इस पूरे रैकेट की उच्च स्तरीय जांच कर, फर्जी मज़दूरों के नाम पर हो रही मज़दूरी की निकासी को तुरंत रोकने की जरूरत है और  पूर्व में प्रदेश के अन्य जिलों में  इस तरह की घोटाले की सूचना मिली रही है।

 

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