
कुल 112488 यानी 21.76% वक्फ संपत्तिया 02 माह में उम्मीद पोर्टल पर दर्ज हुई।
कुल 288049 वक्फ संपत्तिया केंद्रीय पोर्टल पर और अधिक अप्रूव्ड हई।
वक्फ टुडे : जावेद अहमद – संपादक
दिल्ली : अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय वक्फ संपत्ति दस्तावेज़ीकरण और UMEED फ्रेमवर्क के तहत हासिल प्रगति के वास्तविक स्थिति को उजागर करना चाहता है, हाल ही में प्रकाशित समाचार पत्र Print की रिपोर्ट के संदर्भ में।
मंत्रालय यह भी सराहना के साथ नोट करता है कि देश भर में राज्य वक्फ बोर्डों द्वारा कितना मजबूत समर्थन दिया गया है, जो विधि के प्रावधानों को लागू करने में बहुत उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ सहयोग कर रहे हैं।
UMEED अधिनियम, 2025 के तहत, UMEED केंद्रीय पोर्टल के 06.06.2025 को लॉन्च होने से छह महीने का समय वक्फ संपत्तियों और वक्फ के लिए समर्पित संपत्तियों का विवरण अपलोड करने के लिए प्रदान किया गया था।
यह अवधि 06.12.2025 को समाप्त हो गई।
सर्वोच्च न्यायालय ने विस्तार को अस्वीकार कर दिया और निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को आगे की समय सीमा विस्तार के लिए धारा 3B (2) के तहत आवेदन करना होगा।
अधिनियम स्वयं एक समाधान प्रदान करता है — वक्फ न्यायाधिकरण, जब संतुष्ट हो जाए, तो छह महीने तक के विस्तार की अनुमति दे सकता है। तदनुसार, 17 राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों ने फरवरी 2026 से, कानूनी रूप से केवल, 2–6 महीने के लिए विस्तार प्रदान किए गए हैं।
03.03.2026 को (UMEED पोर्टल डेटा के अनुसार):
6,29,528 संपत्तियों का आरंभ किया गया
2,88,049 अप्रूव्ड219864 सबमिट
33108 वेरिफाइड
37,995 अस्वीकृत संपत्तियाजबकि 02 माह पहले दिनांक 7.6.2025 मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार :
517040 संपत्तियों का आरम्भ किया गया।
213941 संपत्तियां सबमिट हुई 216 905 संपत्तियां अप्रूव्ड हुई
10 869 अस्वीकृत हुईकुल आजतक की प्रोग्रेस (आंकड़ों में )
112488 आरम्भ यानी 21.76% की प्रगति हुई।
5923 सबमिट यानी 2.77% की प्रगति हुई।
71144 अप्रूव्ड यानी 32.8% प्रगति हुई।
श्री जावेद अहमद, अध्यक्ष, वक्फ वेलफेयर फोरम ने मुत्वालियों और वक्फ बोर्डों के प्रयासों की सराहना की और साथ ही साथ उन्होंने गंभीर चिंताएं भी व्यक्त की जो अधिकांश राज्यों जैसे यूपी, एम.पी और महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड UMEED पोर्टल पर पंजीकरण के दौरान तकनीकी और परिचालन संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
अभी बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियां अपलोड की जानी बाकी हैं।
वक्फ बोर्ड और मुत्वालियों ने नियमित रूप से “सेंट्रल UMEED पोर्टल” प्राधिकारी को रिपोर्ट किया है। परन्तु पोर्टल अभी भी परिचालन / तकनीकी समस्याओं का सामना कर रहा है, जिससे मुत्वालियों को असुविधा हो रही है।
फोरम ने यह भी उजागर किया कि दिल्ली वक्फ बोर्ड के प्रशासक से समय विस्तार के लिए अनुमोदन प्राप्त नहीं कर सका है जिसे ट्रिब्यूनल अथवा हाई कोर्ट में एक्सटेंशन के अप्रोच कर सके।
चूंकि सभी वक्फ संपत्तियां अंतिम रूप से पोर्टल पर 6 दिसंबर 2025 से पहले वेरिफिकेशन और अनुमोदन के लिए सबमिट की गई थीं, परंतु अभी तक अनुमोदन नहीं हुआ है।
मंत्रालय को इस पर निगरानी रखनी चाहिए और देरी के लिए संबंधित अधिकारियों के उचित दिशा निर्देश जारी करनी चाहिए।
फोरम ने यह भी सिफारिश की है कि MoMA को सभी राज्यों को उपयुक्त दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए ताकि वक्फ न्यायाधिकरणों में आवश्यक सदस्य नियुक्त किए जा सकें, ताकि वे कार्यशील हों और लंबित मामले निपटाए जा सकें।
श्री शाहिद अनवर, अधिवक्ता सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि विभिन्न वक्फ न्यायाधिकरणों में आवश्यक सदस्य नहीं हैं जैसे कि यूपी, दिल्ली और कई अन्य न्यायाधिकरण कार्यशील नहीं हैं क्योंकि वक्फ न्यायाधिकरणों में अनिवार्य सदस्य उपलब्ध नहीं हैं।



