
लखनऊ में सुन्नी प्रतिनिधिमंडल की शिया नेताओं से मुलाकातः अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत पर गहरा दुख और उम्माह के एतहाद का पैगाम
लखनऊ, 14 मार्च 2026ः आज लखनऊ में एक ऐतिहासिक और दिल को छू लेने वाला मंजर देखने को मिला, जब शहर के मशहूर और जाने-माने सुन्नी शख्सियात के एक वफ्द ने इरान के साबिक रहबर आयतुल्लाह अली हुसैनी खामेनेई की शहादत पर तअजियत पेश करने के लिए बड़े शिया रहनुमाओं से मुलाकात की। यह मुलाकात फिरकावाराना एतहाद और भाईचारे की एक जीती-जागती तस्वीर है।
इस वफ्द में शामिल थेः जनाब अनीस अंसारी (रिटा. आईएएस), जनाब तारिक सिद्दीकी, जनाब मोहम्मद खालिद, जनाब अमीक जामेई, जनाब रेहान नईम साबिक विधायक, जनाब जावेद अहमद चेयरमैन, वक्फ वेलफेयर फोरम , जनाब आसिफुजमान लीडर समाजवादी , जनाब हम्माम वहीद और जनाब आजीज हैदर। उन्होंने मौलाना सैफ अब्बास, मौलाना यासूब अब्बास और अफताब-ए-शरीयत मौलाना डॉ. कल्बे जवाद नकवी से उनके आवासों पर जाकर मुलाकात की और ईरान में हुए हमलों में 48 सीनियर लीडरों की शहादत पर गहरे रंज-ओ-गम का इजहार किया।
वफ्द ने कहा कि 28 फरवरी 2026 को हुए पश्चिमी-इजराइली हमलों में सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई की शहादत सिर्फ ईरान या सिर्फ शिया समुदाय के लिए सदमा नहीं है, बल्कि यह पूरी मिल्लत-ए-इस्लामिया के लिए एक बड़ा सदमा है। आयतुल्लाह खामेनेई सिर्फ ईरान के लीडर नहीं थे, बल्कि वह पूरी दुनिया के मजलूमों की आवाज थे।
अनीस अंसारी ने इस मौके पर कहा, ‘‘हम आज सिर्फ तअजियत पेश करने नहीं आए हैं, बल्कि इस पैगाम के साथ आए हैं कि हम सब एक उम्माह हैं। आयतुल्लाह खामेनेई का ख्वाब था कि शिया और सुन्नी एक हों। आज हम उसी ख्वाब को हकीकत में बदलने के लिए यहाँ हैं।’’
तारिक सिद्दीकी ने कहा कि यह हमले असल में फलस्तीन की आजादी की आवाज को दबाने के लिए किए गए हैं। उन्होंने कहा कि हम भारत के लोगों को चाहिए कि वह ईरान और फलस्तीन के लोगों के साथ खड़े हों।
मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने सुन्नी वफ्द के इस कदम की तारीफ करते हुए कहा, ‘‘हमारे सुन्नी भाइयों का हमारे गम में शरीक होना हमारे दिलों को सुकून देता है। यही असली इस्लाम है और यही पैगाम आयतुल्लाह खामेनेई का भी था कि हम सब एक हैं।’’
मौलाना जहांगीर आलम कासमी, से प्रतिनिधि मंडल ने मुलाक़ात की और उन्होंने इस कोशिश को सराहा और मज़बूती के साथ ईरान के साथ मिलकर खड़े रहने की तईद की।
यह पूरा प्रोग्राम इस बात की तस्दीक करता है कि लखनऊ की मिट्टी में हमेशा की तरह आज भी गंगा-जमुनी तहजीब और भाईचारे की खुशबू मौजूद है। सभी उलेमा ने प्रतिनिधि मंडल का इस पहल का स्वागत किया और इस दुख के घड़ी हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया अदा किया।
जारीकर्ता:
प्रतिनिधिमंडल, लखनऊ





