
उत्तर प्रदेश सरकार और अदालतों के बीच क्या सब कुछ ठीक है ?
वक्फ टुडे : दानिश रिपोर्टर
लखनऊ : एक मामला बहेड़ी तहसील ग्राम थिरिया नथमल , जिला बरेली के मस्जिद के रिनोवेशन के लिए हाईकोर्ट के निर्देश के बाजूद जिलाधिकारी से इजाजत नहीं मिला ,जो अत्यंत गंभीर मामला सामने आया है।
उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड में मस्जिद का निर्माण के लिए जिला प्रशासन के पास कोई मानक उपलब्ध नहीं , मस्जिद या मदिर लीगल या इलीगल कैसे ?
वक्फ नंबर 1971 A , बहेड़ी , जिला , बरेली के कदीम मस्जिद है जिसके रिपेयर वर्क के लिए उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वकफ बोर्ड से 18 दिसंबर 2023 में 5 साल तक के लिए अपने खर्चे मरमत के लिए बोर्ड से हासिल किया जाता है , जबकि इस मामले में जिलाधिकारी एवं अल्पसंख्यक अधिकारी द्वारा उप जिला अधिकारी , बहेड़ी को नियमानुसार कार्रवाई करने की दिशा निर्देश दिया जाता है। जबकि मस्जिद मुतवली सोहलत हुसैन के मुताबिक एक लंबी जद्दोजहद के बाद एसडीएम के मौखिक आदेश के अनुसार मस्जिद का काम शुरू होने के फौरन बाद पुलिस ने यह कह काम को करके रोक दिया कि जिलाधिकारी से परमिशन है?
दिलचस्प बात यह कि मुतवली जिला अधिकारी को वक्फ बोर्ड और उप जिलाधिकारी बहेड़ी के पत्राचार पुनः पेश किया लेकिन लोकल थाना और उप -जिलाधिकार ने मरम्मत के लिए इजाजत नहीं दिया।
इस तरह मस्जिद के मुतवल्ली और ग्राम प्रधान को प्रशासनिक अमला ने लगभग 03 सालों में उनके पैसे और वक्त को जाया किया।
मुतवली अपने मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट ( 39963/ 202) दाखिल किया , जस्टिस नीरज सुनवाई के दौरान किस नियम तहत किसी मस्जिद के निर्माण केए लिए NOC नहीं दिया जा सकता । मा. उच्च न्यायालय ने जिलाधिकारी को 1 माह के भीतर निस्तारण करने के लिए निर्देश दिया है ।
लेकिन राज्य सरकार अदालत के ऐसे आदेशों को संज्ञान में नहीं लेती यह तो जग जाहिर है ।
इस प्रकरण में 13 फरवरी से 13 मार्च तक 1 माह से ज्यादा हो गया लेकिन जिला प्रशासन ने अभी तक मस्जिद का तामीर का काम शुरू नहीं हो सका है।
अदालत यह जानना चाहता है कि किस नियम तहत मस्जिद के निर्माण के लिए इजाजत चाहिए ।क्या इस देश या राज्यों में मस्जिद अलग अलग लोगों के लिए अलग अलग कानून है।


