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लिमिटेशन एक्ट, 108A, 104, 3D और 3E के प्रभावी होने से लाखों वक्फ संपत्तियों की मिलकियत खत्म हो सकती है:

कोर्ट ने रोक लगाई 3r, 3c और गैर मुस्लिम में बोर्ड सदस्य नामित होंगे।

*सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला वक्फ संपत्तियों को खुर्द बूर्द को बढ़वा मिलेगा  ।

लिमिटेशन एक्ट, 108A, 104, 3D और 3E के प्रभावी होने से लाखों वक्फ संपत्तियों की मिलकियत खत्म*:

वक्फ टुडे

दिल्ली : वक्फ अमेंडमेंट एक्ट 2025 अब रिलिजियस मामला नहीं रहा कोर्ट ने पूरे एक्ट पर स्टे देने से किया इनकार :
कोर्ट कुछ प्रावधानों पे कंडीशनल स्टे दिया लेकिन बहुत से बिंदुओं पर कोई दिशा निर्देश नहीं जैसे उम्मीद पोर्टल के समय सीमा और वक्फ बाय यूजर्स ।

धारा 107 को हटा दिया गया है, जो लिमिटेशन कानून से सुरक्षा प्रदान कर रही थी, अब लिमिटेशन कानून को वक्फ पर लागू किया गया है। इवेक्यू वक्फ संपत्तियों के संबंध में विशेष प्रावधान को हटा दिया गया है। धारा 108ए के ओवरराइडीग प्रभाव को हटा दिया गया है जो किसी भी लागू कानून से सुरक्षा प्रदान करता था।

राज्य वक्फ बोर्ड में 3 गैर मुस्लिमों और केंद्रीय वक्फ परिषद में 4 गैर मुस्लिमों को अनुमति दी गई है।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी गैर मुस्लिम भी हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा हालांकि, एक राय यह थी कि जितनी जल्दी हो सके एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने का प्रयास किया जाना चाहिए जो मुस्लिम समुदाय से हो।
वक्फ का पंजीकरण 6 महीने की अवधि के भीतर किया जाना चाहिए और यदि पंजीकृत नहीं है, तो अदालत में साबित करने के लिए पर्याप्त कारण के साथ अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। 3ब (1) & (2)।

5 साल की मुस्लिम प्रैक्टिस को तब तक के लिए रोक लगा दिया गया है जब तक कि राज्य इसके लिए नियम नहीं बना लेता है ।
जो यह तय करेगा कि 5 साल तक एक प्रैक्टिसिंग मुस्लिम है या नहीं ।
धारा 3सी पर रोक लगा दी, जहां कलेक्टर घोषणा कर सकता था, लेकिन इसके लिए हाईकोर्ट या ट्रिब्यूनल के आदेश की आवश्यकता थी और अंतिम निपटान तक किसी तीसरे पक्ष के हित का निर्माण नहीं किया जा सकता थ।
इसका मतलब है कि 3सी के तहत कलेक्टर जांच शुरू कर सकता है, लेकिन फैसला नहीं ले सकता है।
वही धारा 3डी की अनुमति दी गई । जिसमें सम्भल की मस्जिद वक्फ  नहीं होगी । अब आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया मालिक होगा,  ऐसी तकरीबन 300 से ज्यादा वक्फ संपत्तियों नहीं बचेगी।
धारा 104 को हटा दिया गया, अब  गैर मुस्लिम वक्फ या दान नहीं कर सकता है।

राज्यों को राहत 
कुल 7 राज्यों में सर्वे हुए है उन्हें  राहत मिल सकती है। उत्तरप्रदेश,उत्तराखंड ,पंजाब ,केरल , राजस्थान और कर्नाटक और  वेस्ट बेगाल वक्फ बोर्ड शामिल है।

नुकसान वाले राज्य:
जिन राज्यों में सर्वे नहीं हुए है उनमें  ज्यादा नुकसान हो सकते है । जैसे बिहार  में 8500 से ज्यादा कब्रिस्तान राज्य सरकार की मिल्कियत होगी ना की वक्फ बोर्ड की।
जम्मू कश्मीर , अंडमान निकोबार लक्षद्वीप झारखंड छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती राज्यों में 3E के वजह से उसकी मिलकीयत समाप्त हो गई।

चेयर , वक्फ वेलफेयर फोरम का कहना कि सुप्रीम कोर्ट से कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। जो कुछ भी स्टे मिला है वह फाइनल नहीं है

अलबत्ता मुसलमानों के धार्मिक मामलों पर कानून के माध्यम से अतिक्रमण किया जा रहा है। अब धार्मिक ना हो कर सेकुलर कर दिया गया ।

अब  संसद द्वारा कानून बना कर मुस्लिम के उनकी धार्मिक कस्टम्स क्या होंगी ? और गैर-मुस्लिमों को प्रबंधन का हिस्सा बनने की अनुमति दी जा रही है।
क्योंकि सरकार इस कानून से चाहती है कि वक्फ एक संपत्ति प्रबंधन है और गैर-मुस्लिम भी इसका हिस्सा हो सकता हैं।
पहले  से ही, मुसलमानों को संसदीय लोकतंत्र के माध्यम से धार्मिक प्रथाओं के किसी भी समावेश, अतिक्रमण और कमजोर पड़ने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
यह सुरक्षा सर्वोच्च अदालत को प्रदान करना है।
संसद से कानून को मुसलमानों की धार्मिक प्रथाओं में संशोधन करने का कोई अधिकार नहीं है।
ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड वक्फ वेल्फेयर फोरम और पेटीशनर को उम्मीद है कोर्ट में अभी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी जब तक वक्फ की प्रबंधन और सुरक्षा अदालत से नहीं मिल जाती है।

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