50 एकड़ से ज्यादा रकबा वाले वक्फ संपत्तियां की जानकारी जिलाधिकारी दफ्तर में देना होगा : अल्पसंख्यक, मंत्रालय भारत सरकार ,
उम्मीद पोर्टल पर अलल औलाद और एक्जम्प्टेड श्रेणी की वक्फ संपत्तियों का इंद्राज दस्तावेज के अभाव में नहीं हो रहा है: एडवोकेट शाहिद अनवर , सुप्रीम कोर्ट

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उम्मीद पोर्टल पर अलल-अलल औलाद और एक्जम्प्टेड वक्फ संपत्तियों का इंद्राज दस्तावेज के अभाव में नहीं हो रहा है:
50 एकड़ से ज्यादा रकबा वाले वक्फ संपत्तियां की जानकारी जिलाधिकारी दफ्तर में देना होगा : अल्पसंख्यक,भारत सरकार ,
उत्तर प्रदेश और कई राज्यों में 5 जून 2026 को पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन का समय सीमा समाप्त हो रहा है।
वक़्फ़ टुडे : हसीब अख्तर
लखनऊ : उम्मीद पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख 5 जून 2026 है जबकि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रजिस्टर्ड वक्फ प्रॉपर्टी की संख्या जिसमें दर्ज हैं अगर हम सुन्नी वर्क बोर्ड की कमर्शियल और नॉन कमर्शियल वह संपत्तियों की जायजा ले तो मालूम होगा कि दफा 37 ( 2173) एवं वापसी पोर्टल के मुताबिक 53 81 है।
गौरतलब है कि लखनऊ शहर में मिल्ली तंजीम ने 3307 वक्फ संपत्तियों का इंद्राज 6 दिसंबर 2025 तक हुआ, वहीं 700 से ज्यादा वक्फ संपत्तियां को बोर्ड के अधिकारियों द्वारा रिजेक्ट कर दिया गया।
जबकि मिल्ली तंजीम जैसे अंजुमन इस्लाहुल मुस्लिमीन , इस्लामिक सेंटर और दीगर तंजीम ने एवं मूतवलि यों ने काम किया लेकिन रिजेक्टेड वक़्फ़ को दुरुसत करने कोई रुचि नहीं। सैकड़ों से ज्यादा शहरी और ग्रामीण वक्फ संपत्तियां इंद्राज नहीं हुई हैं।
इसकी जिम्मेदारी किस पर?
जिन मुतवल्लियों के पास शहर के बेशककीमती वक्फ के मिल्कियत हासिल है , उन्होंने इस काम में भाग नहीं लिया सिर्फ अपनी संपत्तियों को दर्ज कराया और अप्रूवल करा लिया जैसे टीले वाली मस्जिद , ईदगाह ऐश बाग , आलमबाग , आलमबाग जमा मस्जिद , अंजुमन इस्लाहुल मुसलिमन और कपूरथला, लालबाग, चारमीनार , गवर्नर हाउस मस्जिद और कुछ भी नामचीन दरगाह और मजारों के सजाद नशीने भी आगे नहीं आये ।
सूबे में सबसे ज्यादा वक्फ संपत्तियों की सूची में गोंडा – बलरामपुर जिले में तकरीबन 6000 दर्ज है लेकिन 1450 ही पोर्टल पे दर्ज हो सकी है ।
लखनऊ अपने वरासत और पहचान के लिए जाना जाता है लेकिन लगभग हजारों वक्फ संपत्तियों का इंद्राज किसके जिम्मे।
वही लखनऊ में बोर्ड द्वारा तकरीबन 700 से ज्यादा वक्फ संपत्तियों को रिजेक्ट कर दिया गया , जो दोबारा दुरुस्त कर सबमिट किया जाना है ।
हालही में लखनऊ में कदीम कब्रिस्तान वक्फ नंबर 2163 और दरगाह भोले शाह के जमीन पर LDA एवं नगर निगम बाउंड्रीवाल बना रही और बुल्डोजर से क़ब्र को भी खो द रही है।
जबकि यह वक्फ बाय यूजर के श्रेणी में आती है।
वही इस्लाहूल मुस्लिमन तंजीम सो रही है और अब ट्रिब्यूनल गई है जो
काफी देर हो चुकी है।
जो तंजीम काम नहीं काम रही और वक्फ संपत्तियों को नहीं बचा पा रही उन् मुतवलियो को हटा देना चाहिए और बोर्ड को खुद संचालन करना चाहिए ।
जैसा कि पूर्व में भी बोर्ड शहर के बड़ी commercial को मैनेज करती है।
अब वक्त आ गया कि वक़्फ़ संपत्तियों को बचाने की और कब्जेदार चाहे वह सरकार या मुतवल्ली हो उससे छुड़ाना है , क्योंकि आप के पास अब कुछ खोने के लिए बचा नहीं है।
बोर्ड में सूचीबद्ध वकीलों का हाल कैजुअल और कब्जेदारों के तरफ मायल होते है।
सम्भल की मस्जिद वक्फ बाय यूजर और सारे डॉक्यूमेंट होने के होने के बाजूद स्टे निरस्त हो गया।
शिया लीडर कल्बे जव्वाद साहेब शहर के अंदर हुसैनाबाद ट्रस्ट बचाने के लिए धरने पर बैठे है , क्या सुन्नी शहर मुफ्ती और मिल्ली तंजीम वक्फ नंबर 2163 को बचाने के लिए कब आगे आएंगे।
राज्य सरकार और वक्फ बोर्ड से सीमित सहयोग हासिल भी नहीं होने के साथ क़ौमी तंजीम को आना चाहिए , इसमें आवाम को रोल कम तंजीम शहर मुफ्ती , चाँद कमेटी और दानिशवरों का रोल ज्यादा है।
आप का सहयोग नस्लों के लिए वक्फ महफ़ूज़ रखने में मदद हो सकती है।
वक़्फ़ वेलफेयर फोरम से जुड़े ..
Umeedportal@gmail.com
7054337542
लिंक लेटर 50 एकड़ जमीन




