

वक्फ प्रॉपर्टी टाइटल पर फैसला लेने का अधिकार
सिर्फ वक्फ ट्रिब्यूनल के पास: सुप्रीम कोर्ट
वक्फ प्रॉपर्टी को कानूनी/गैरकानूनी घोषित करने का फैसला जिला प्रशासन और वक्फ बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
वक्फ वेलफेयर फोरम ने जिला प्रशासन की कार्रवाई गैर-कानूनी बताया।
वक्फ टुडे: अलीगढ़ वक्फ बोर्ड और नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन को लिखा लखनऊ/अलीगढ़ (वक्फ टुडे): अलीगढ़ जिले में स्थित वक्फ कब्रिस्तान किशनपुर (गोवेला गैस गोदाम के पास) राम घाट रोड, अलीगढ़, जिसका वक्फ नंबर इंस्पेक्टर म्युनिसिपल की रिपोर्ट के अनुसार 2121 है, पहले का नंबर 607, मौजूदा नंबर 1043 है।
यह वक्फ कब्रिस्तान किशनपुर, जिला अलीगढ़, उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और रेवेन्यू रिकॉर्ड में 21-05-1992 से रजिस्टर्ड है। इस पुराने कब्रिस्तान के पुराने रिकॉर्ड देखे बिना ही इसे गैर- कानूनी घोषित कर अलीगढ़ डेवलपमेंट अथॉरिटी के सह से भू-माफिया ने कब्रिस्तान पर 28-01-2026 को श्रब्ठ से कब्जा कर, तोड़फोड़ का काम करते हुए बाउंड्री वॉल का कंस्ट्रक्शन का काम शुरू कर दिया गया है।
दूसरी तरफ कब्रिस्तान पर कब्जे और तोड़फोड़ के खिलाफ स्थानीय लोगों और पार्टी नेताओं ने जिला कलेक्ट्रेट पर इकट्ठा होकर तोड़फोड़ के काम का विरोध विरोध दर्ज किया और जिलाधिकारी ने अगले समवार तक कंस्ट्रक्शन का काम रोक दिया।
जावेद अहमद , अध्यक्ष – वक्फ वेलफेयर फोरम ने जिला प्रशासन के इस कार्रवाई को गैरकानूनी बताया और सुप्रीम कोर्ट के हाल ही में एक फैसले में वक्फ ट्रिब्यूनल को वक्फ टाइटल डिसाइड करने के अधिकार को तरजीह दिया।
जैद खान मजहरी, शहर मुफ्ती (वक्फ) अलीगढ़ की कायदत में वक्फ एक्टिविस्ट गुलजार अहमद, इजहार सैफी मोईन कुरैशी , युनुस आगा और सामाजिक कारकूनान के साथ एडीएम को मैमोरेंडम दिया। ।



